पाँच दिवसीय उत्सव: हैं दीपावली, जिसके हर्षोल्लास में जलते है दिये

दीपावली (रोशनी का पर्व) भारत के सबसे प्रमुख और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है । यह पर्व सत्य की असत्य पर, प्रकाश की अंधकार पर और अच्छे की बुरे पर जीत का प्रतीक है। [
दीपावली का संक्षिप्त लेख़ / निबंध
परिचय:
दीपावली शब्द ‘दीप’ और ‘आवली’ (पंक्ति) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है दीपों की पंक्ति या श्रृंखला । यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन चारों ओर दीयों की रोशनी और पटाखों की गूंज होती है। [
दीपावली शब्द ‘दीप’ और ‘आवली’ (पंक्ति) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है दीपों की पंक्ति या श्रृंखला । यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन चारों ओर दीयों की रोशनी और पटाखों की गूंज होती है। [
पौराणिक और धार्मिक महत्व:
श्रीराम की अयोध्या वापसी: भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास और रावण का वध कर माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ इसी दिन अयोध्या लौटे थे, जिसके उल्लास में दीये जलाए गए थे।
लक्ष्मी-गणेश पूजन: इस शाम धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी तथा बुद्धि के देवता भगवान गणेश की पूजा होती है।
अन्य मान्यताएं: जैन धर्म में भगवान महावीर को निर्वाण और सिखों में इसे ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। [
पाँच दिवसीय उत्सव:
यह पर्व पाँच दिनों तक चलता है:
यह पर्व पाँच दिनों तक चलता है:
- धनतेरस: नई वस्तुएं, बर्तन या धातुओं की खरीदारी की परंपरा।
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): घरों की सजावट और दीये जलाना।
- दीपावली: मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजन, मिठाइयाँ और आतिशबाजी।
- गोवर्धन पूजा: गोवर्धन पर्वत और भगवान कृष्ण की आराधना।
- भैया दूज: भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक पर्व।
दीपावली आंतरिक अहंकार और अज्ञान को मिटाकर जीवन में प्रेम एवं भाईचारे का प्रकाश फैलाने का संदेश देती है।
