धर्मनगरी ज्योतिर्मठ में श्रीअरविन्द के 154वें जन्मोत्सव पर भव्य आयोजन

ज्योर्तिमठ-ज्योतिर्मठ में स्वाधीनता संग्राम सेनानी, योगी, ऋषि-कवि, महान दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु महर्षि श्रीअरविन्द का 154वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्रीअरविन्द अध्ययन केंद्र ज्योतिर्मठ के तत्वावधान में विकासखंड सभागार में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें नगर समाज के प्रत्येक क्षेत्र के गणमान्य लोगों, बुद्धिजीवी वर्ग, विद्यार्थियों और केंद्र के साधकों ने भाग लिया। इस अवसर पर युवाओं के बीच महर्षि के जीवन और दर्शन की रुचि और ज्ञान का प्रसार करने के लिए नगरपालिका क्षेत्र के शिक्षा संस्थानों से पधारे विद्यार्थियों के बीच भाषण, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया और विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार, मैडल, प्रमाणपत्र और श्रीअरविन्द साहित्य देकर सम्मानित किया गया।
भाषण प्रतियोगिता का विषय “श्रीअरविन्द की दृष्टि में ‘नए और विकसित’ भारत का अर्थ” था जबकि निबंध प्रतियोगिता का विषय था : ‘राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर श्रीअरविन्द का चिंतन’ और चित्रकला प्रतियोगिता का विषय था : ‘जब तक मेरा शहर स्वच्छ नहीं है, तब तक मेरा घर स्वच्छ नहीं है’.
(My home is not clean as long as my city is unclean)
पालिका परिषद के सभी विद्यालयों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने इन प्रतियोगिताओं में पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
महायोगी के 154वें जन्मोत्सव में उपाध्यक्ष श्रीबद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति और पूर्व पालिकाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती बतौर अतिथि उपस्थित रहे। खंड विकास अधिकारी ज्योतिर्मठ मोहन जोशी, भुवन चंद्र उनियाल, आचार्य रामदयाल मैदुली, स्वामी समृद्ध पुरी महाराज बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए।
सभी अतिथियों ने नए भारत के निर्माण में श्रीअरविन्द के विचार दर्शन और अध्यात्मिक आभा को महत्वपूर्ण बताया. मुख्य अतिथि श्री सती ने उन्हें भारतीय स्वाधीनता संग्राम का एक महत्वपूर्ण नायक बताए हुए कहा कि युवाओं को श्रीअरविन्द साहित्य और विचार दर्शन का अध्ययन करना चाहिए ताकि उन्हें व्यक्तित्व निर्माण की प्रेरणा मिले और वे राष्ट्र निर्माण में अपनी मेधा, शक्ति और कुशलता का सर्वश्रेष्ठ प्रयोग कर सकें. बी. डी.ओ. श्री मोहन प्रसाद जोशी ने ज्योतिर्मठ में युवा पीढ़ी और शिक्षित समाज तक श्रीअरविन्द की सुवास ले जाने के लिए केंद्र की सराहना की. पूर्व धर्माधिकारी बद्रीनाथ धाम श्री भुवन चंद्र उनियाल ने भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के लिए श्रीअरविन्द के कार्यों की मीमांसा की. तपोवन में साधनारत स्वामी समृद्ध पुरी जी महाराज ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन श्रीअरविन्द के बिना अपूर्ण है और योग और आध्यात्मिक दर्शन का अनुगमन ही भारत का मार्ग है. ‘नए और विकसित भारत के लिए श्रीअरविन्द का संदेश’ विषय पर बीज व्याख्यान डॉ. केदारखंडी ने प्रस्तुत किया.
इस अवसर पर ग्रामीण स्वरोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने और सबल मातृशक्ति के रूप में उभरने के लिए ‘समोंण फाउंडेशन सुनील’ की महिलाओं को अनीता पँवार के नेतृत्व में केंद्र की ओर से विशेष रूप से सम्मानित किया गया. अतिथियों के कर कमलों से नगर में आध्यात्मिक विचार संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए डॉ. चरणसिंह केदारखंडी द्वारा संपादित केंद्र की द्विभाषिक पत्रिका ‘अनुकम्पा, The Grace Divine’ का विमोचन भी किया गया. 112 पृष्ठों की इस पत्रिका में देशभर के श्रीअरविन्द स्कॉलर्स और ज्योतिर्मठ केंद्र के सदस्यों के आलेख और कविताएं सम्मिलित हैं. अतिथियों, विद्यार्थियों और नगरवासियों का स्वागत और आभार करते हुए केंद्र अध्यक्ष अरविंद प्रकाश पंत ने कहा कि संस्था ज्योतिर्मठ की धार्मिक और आध्यात्मिक गरिमा को आगे बढ़ाने और विचारवान युवा पीढ़ी के निर्माण हेतु कृतसंकल्पित है. श्री पंत ने नगरवासियों का आह्वान किया कि वे केंद्र से जुड़ें. एडवोकेट अरुण लाल शाह सहित नगर के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे. केंद्र के सक्रिय और विचारवान कार्यकर्ता डॉ. भगत सिंह राणा ‘हिमाद’, कवयित्री विनीता भट्ट, कमला भट्ट, केंद्र के कोषाध्यक्ष श्री प्रकाश चंद्र पँवार, संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य देवेश्वर थपलियाल, चर्चित लोक गायक श्री रवि थपलियाल पैंनखंडी, दिनेश नेगी, केंद्र के युवा समन्वयक डॉ. राजेन्द्र सिंह राणा, प्रियंका देवशाली, विजया ध्यानी, सुलेखा चौहान अधिकारी, गोपी चंद्र उनियाल आदि अनेक सदस्य उपस्थित रहे. संचालन केंद्र के सचिव ओमप्रकाश डोभाल और प्रकाश पँवार ने किया।
