22 September 2026

गढ़वाली कुमाऊंनी जौनसारी को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए : दिनेश ध्यानी

0
IMG-20260921-WA0030

देहरादून।
उत्तराखंड लोक भाषा मंच दिल्ली के संयोजक दिनेश ध्यानी ने प्रदेश के भाषा मंत्री खजान दास को ज्ञापन सौंप कर राज्य में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं को मान्यता दिए जाने की पुरजोर मांग की है।
भाषा मंत्री को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड की तीनों प्रमुख भाषाएं आठ सौ वर्ष से अधिक पुरानी हैं और इनमें हर विधा में साहित्य सृजन हो रहा है, यही नहीं रियासत काल में ये राज काज की भाषाएं रही हैं किंतु पृथक राज्य बनने के बाद भी इन भाषाओं को यथोचित सम्मान नहीं मिल पाया।
श्री ध्यानी ने ज्ञापन में मांग की है कि उत्तराखंड सरकार दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए विधानसभा के आगामी सत्र में प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार से मांग करे कि गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए और प्रदेश में अलग से गढ़वाली कुमाऊंनी जौनसारी भाषा अकादमी गठित की जाए।
श्री ध्यानी ने आग्रह किया है कि उत्तराखंड सरकार संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत प्रदेश में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी को अपने स्तर से मान्यता प्रदान करे। इस अनुच्छेद में प्रावधान है कि अगर कोई भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं भी है तो राज्य सरकार अपने स्तर से उसे मान्यता प्रदान कर सकती है। श्री ध्यानी के साथ ज्ञापन देने वालों में गढ़वाली भाषा के अध्येता आशीष सुंदरियाल तथा अन्य लोग शामिल थे। श्री ध्यानी ने बताया कि भाषा मंत्री खजान दास ने उनकी मांग पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed