कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल गिरफ्तार

देहरादून – उत्तराखंड की राजनीति में शनिवार को उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब प्रदेश की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू को देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने उत्तर प्रदेश के झांसी से गिरफ्तार कर लिया। इस बहुचर्चित मामले में पुलिस ने उनके करीबी और भतीजे सतेंद्र राठौर को भी बरेली से गिरफ्तार किया है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
यह मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कथित धोखाधड़ी, मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी, जान से मारने की धमकी और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए चार कंपनियों में निदेशक पद से हटाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून की कैंट कोतवाली में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि गिरधारी लाल साहू ने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाकर उनसे विवाह किया। इसके अलावा उनके साथ मारपीट करने, प्रताड़ित करने, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए थे।
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि उनके फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और उनकी जानकारी एवं सहमति के बिना उन्हें चार कंपनियों के निदेशक पद से हटा दिया गया। शिकायत के मुताबिक, इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए कंपनियों में पदों का बदलाव कर अनुचित लाभ लेने की कोशिश की गई।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू चार कंपनियों में कथित दस्तावेजी हेराफेरी से जुड़ा है। पुलिस की जांच के अनुसार, मंत्री रेखा आर्य के हस्ताक्षरों का कथित रूप से दुरुपयोग कर उन्हें चार कंपनियों के निदेशक पद से हटाने की कार्रवाई की गई। इन कंपनियों में देवो के देव महादेव, बंखंडी रुद्राक्ष धाम, श्री अंबे ऑटो डीलर्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री बंखंडी धाम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम सामने आए हइस पूरे मामले में गिरधारी लाल साहू और सतेंद्र राठौर की भूमिका की जांच की गई। एसआईटी को प्रारंभिक जांच में कथित फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। मामले की संवेदनशीलता और गंभीर आरोपों को देखते हुए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसपी ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में गठित नौ सदस्यीय टीम को मामले की जांच सौंपी गई।
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग को कब्जे में लिया गया और कई लोगों के बयान दर्ज किए गए। आरोपियों को पूछताछ के लिए नोटिस भी भेजे गए थे। पुलिस की तलाश तेज होने के बाद आखिरकार एसआईटी ने गिरधारी लाल साहू को झांसी और सतेंद्र राठौर को बरेली से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से बचने के लिए गिरधारी लाल साहू ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था। उनकी अग्रिम जमानत याचिका देहरादून की विशेष अदालत से खारिज हो गई थी। इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट में प्राथमिकी निरस्त कराने और गिरफ्तारी से राहत देने की मांग की थी। 4 नवंबर को हाईकोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली।
गिरधारी लाल साहू ने भी वीडियो जारी कर रेखा आर्य पर पलटवार किया था और उनके खिलाफ संपत्ति से जुड़े आरोप लगाए थे। वहीं, रेखा आर्य ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों की जांच कराने की बात कही थी। विवाद के दौरान मंत्री की ओर से कुछ कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक की गई थीं, जिनकी जांच पुलिस ने अपने स्तर पर की।
गिरधारी लाल साहू और सतेंद्र राठौर की गिरफ्तारी को इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने, हस्ताक्षरों के इस्तेमाल और कंपनियों में निदेशक पदों में किए गए बदलावों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि इस कथित प्रकरण में अन्य लोगों की कोई भूमिका रही है या नहीं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाना है। हालांकि, प्रदेश की एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री की ओर से अपने ही पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और अब उनकी गिरफ्तारी होने से यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में खासा चर्चा का विषय बन गया है।
