डोभाल वंशजों का चतुर्थ महासम्मेलन देहरादून में संपन्न एकजुटता, संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व का दिया संदेश

देहरादून। डोभाल वंशजों का चतुर्थ महासम्मेलन रविवार, 18 जनवरी 2026 को सुरकंडासुरी मंदिर परिसर, देहरादून में भव्य रूप से आयोजित किया गया। सम्मेलन में उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए डोभाल वंशजों ने सहभागिता की और सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत तथा भावी पीढ़ी के मार्गदर्शन पर विचार साझा किए।
मुख्य अतिथि रहे डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक
सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं आईटीएम–डीआरडीओ के निदेशक सत्य प्रकाश डोभाल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में डोभाल वंश के मूल पुरुष कर्णजीत डोभाल (संवत 888) के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वंश की पहचान को बनाए रखते हुए समाज को संगठित रहना चाहिए।
एक-दूसरे से जुड़े रहने का आह्वान
वक्ताओं ने समाज के लोगों से आपसी संवाद, सहयोग और पारिवारिक मूल्यों को सशक्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में सामाजिक एकजुटता ही किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत है।
पूर्व शिक्षा सचिव ने रखे विचार
कार्यक्रम में डोभाल वंशजों की कार्यकारिणी के मुख्य संरक्षक एवं मुख्य वक्ता सुशील चन्द डोभाल, पूर्व शिक्षा सचिव (माध्यमिक शिक्षा, उत्तराखंड) ने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विद्वानों और साहित्यकारों ने भी किया संबोधन
सम्मेलन में शिक्षा विशेषज्ञ श्री राज राय, श्री बी.एस. डोभाल, श्री वेदवर्धन डोभाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री सतपाल डोभाल ने अपने विचार रखे। वहीं श्री हरिदत्त डोभाल ने कविता पाठ कर वातावरण को भावनात्मक बना दिया।
इस अवसर पर शिक्षिका वंदना डोभाल की पुस्तक ” राधा कृष्ण प्रेम का दिव्य स्वरूप” का विधिवत विमोचन किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
कार्यक्रम में कीर्ता जैनिस्ट पुरस्कार से समाजसेवी मास्टर पी.बी. एवं सेना अधिकारी श्री अरुण डोभाल को विशिष्ठ सम्मान प्रदान किया गया।
सम्मेलन की अध्यक्षता विशेष डोभाल (एमबीए – उद्यम प्रबंधन) ने की। कार्यक्रम का संचालन प्रगति चन्द डोभाल ने किया। कार्यकारिणी में कैलाश दत्त, लक्ष्मण, किशन नंद, विवेकानंद, पुष्कर सिंह, महासचिव डोभाल वंशज परिवार कार्यकारिणी समिति भगवती प्रसाद डोभाल, कुशलानंद डोभाल, वंदना डोभाल, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ भावना डोभाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
