26 October 2026

पेड़ बचाओ, हिमालय बचाओ’: मुन्दोली-लोहाजंग में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने निकाली जागरूकता रैली

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पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान: मुन्दोली-लोहाजंग बाजार क्षेत्र में अनंत नन्दा फाउण्डेशन के नेतृत्व में निकली भव्य मुन्दोली को बचाने का संकल्प: अनंत नन्दा फाउण्डेशन की अनूठी पहल*

चमोली। प्रकृति, पर्यावरण और हिमालयी आंचल को प्रदूषणमुक्त रखने के उद्देश्य से अनंत नन्दा फाउण्डेशन (ANNT NANDAS FOUNDATION) के तत्वावधान में मुन्दोली-लोहाजंग के मुख्य बाजार में एक भव्य और प्रेरणादायक पर्यावरण संरक्षण रैली का आयोजन किया गया। इस महाअभियान का मुख्य उद्देश्य स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को पर्यावरण व जंगलों के प्रति जागरूक करना था, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी इस pristine (स्वच्छ) प्रकृति का उसी तरह आनंद ले सकें, जैसे आज हम ले रहे हैं।इस रैली का नेतृत्व पूर्व सैनिक, इंटरनेशनल अल्ट्रा ट्रेल रनर, COAS अवार्डी, GOC-in-C अवार्डी, गवर्नर अवार्डी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अनंत नन्दा फाउण्डेशन के संस्थापक व निदेशक कलम सिंह बिष्ट ने किया। उनके मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने स्थानीय जनमानस के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। शानदार सहभागिता और विशाल जनसमर्थन

25 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस रैली में समाज के हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस महाअभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें 6 वर्ष के नन्हे बच्चों से लेकर 55 वर्ष तक के ऊर्जावान नागरिकों ने कुल 50 से अधिक संख्या में सक्रिय रूप से भाग लिया। मुंडोली और लोहाजंग के मुख्य बाजार से गुजरी इस रैली का उत्साह इतना व्यापक था कि इसे देखने और समर्थन देने के लिए 1000 से अधिक दर्शकों व पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी। रास्ते भर लोगों ने रैली के नारों का स्वागत किया और पर्यावरण संरक्षण के इस कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की। व्यापक संदेश और महत्वपूर्ण व्याख्यान ।रैली के दौरान स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और पर्यटकों को विशेष संदेश दिया गया कि वे हमारे पर्यावरण, वनों और हिमालय को प्रदूषण तथा अंधाधुंध वनों की कटाई (deforestation) से बचाएं। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यदि आज हमने अपने हिमालय और जंगलों को नहीं बचाया, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम पूरी मानवता को भुगतने होंगे।

रैली के पश्चात एक विशेष ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने जंगल, पर्यावरण, प्रदूषण और हिमालय के भौगोलिक व पारिस्थितिक अस्तित्व पर विस्तार से चर्चा की। व्याख्यान के दौरान वनों और पर्यावरण के संरक्षण से मिलने वाले अनगिनत लाभों (Pros) तथा पेड़ों के कटने और प्रदूषण बढ़ने से होने वाले भारी नुकसान (Cons) पर गहन प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने समझाया कि कैसे हिमालयन इकोसिस्टम पूरे उत्तर भारत की जलवायु को नियंत्रित करता है और इसका संरक्षण कितना अनिवार्य है।

*उल्लासपूर्ण समापन और अल्पाहार*
रैली और वैचारिक सत्र की सफलता के बाद सभी प्रतिभागियों और आयोजकों ने मिलकर इस आयोजन का जश्न मनाया। कार्यक्रम के अंत में सभी को समोसा, मिष्ठान (स्वीट), और बिस्कुट आदि का अल्पाहार वितरित किया गया, जिसे सभी ने बड़े आनंद के साथ ग्रहण किया। इस प्रकार यह आयोजन न केवल जागरूकता का एक सफल माध्यम बना, बल्कि आपसी प्रेम और सामुदायिक एकता का भी एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर गया।

 

 

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