25 April 2026

गुरु कृपा से सत्संग होता है और सत्संग से भगवान की सिद्धि होती है-आचार्य तुलसीराम देवशाली

0
IMG-20260425-WA0142

ज्योतिर्मठ

श्रीअरविन्द अध्ययन केंद्र ज्योतिर्मठ के साधकों और सदस्यों ने श्रीअरविन्द आश्रम पॉन्डिचेरी की अधिष्ठात्री भगवती श्रीमाँ के अंतिम रूप से भारत आगमन की बेला 24 अप्रैल की तिथि पर उनके जीवन, संदेश और योग यात्रा को याद करके भावपूर्ण स्मरण किया। श्री बद्रीनाथ वेद वेदाङ्ग संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भक्त और अनुयायियों द्वारा सबसे पहले माताजी के चित्र पर दीप प्रज्वलन किया गया और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की गई। 10 मिनट के सामूहिक ध्यान के पश्चात केंद्र के वरिष्ठ सदस्य और कोषाध्यक्ष प्रकाश पँवार ने उपस्थित सभा में विषय भूमिका रखी। केंद्र के युवा समन्वयक डॉ. राजेन्द्र सिंह राणा ने सालभर में आने वाले चार प्रमुख दर्शन दिवसों — 21 फरवरी, 24 अप्रैल, 15 अगस्त और 24 नवंबर — के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य देवेश्वर थपलियाल ने कहा कि नए भारत के निर्माण में श्रीअरविन्द और श्रीमाँ के विचारों का समावेश अनिवार्य है। केंद्र की संयुक्त सचिव और उदीयमान कवयित्री विनीता भट्ट सिलोड़ी ने केंद्र से जुड़े नए सदस्यों यथा सुमेधा भट्ट,विजया ध्यानी, पूनम अग्रवाल, गोपी चंद उनियाल, शेष नारायण भट्ट, रेखा शर्मा और किरण अग्रवाल का पत्रिका, सदस्यता कार्ड और श्रीअरविन्द सोसायटी की परिचय पुस्तिका देकर स्वागत किया। केंद्र के पूर्व अध्यक्ष और समाजसेवी आचार्य तुलसीराम देवशाली ने ‘जीवन ने गुरु के महत्व’ पर बोलते हुए कहा कि गुरु कृपा से सत्संग होता है और सत्संग से भगवान की सिद्धि होती है। उन्होंने भारतीय परंपरा में गुरु के मूल्य को सुंदर दृष्टांतों के द्वारा रेखांकित किया। बीज व्याख्यान देते हुए लेखक और साधक डॉ. चरणसिंह केदारखंडी ने विस्तार से श्रीअरविन्द और माताजी के जीवन की सुवास को साधकों के सम्मुख रखते हुए नित्य प्रति के जीवन से योग को जोड़ते हुए कहा कि सदस्य बनना आसान है लेकिन साधक बनना पूरे जीवन की साधना है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता सुंदर जीवन जीने की कला का नाम है और आध्यात्मिक जीवन दृष्टि के विकास के द्वारा ही हम अपने जीवन के ज्वारों का मुकाबला करते हुए उच्चतम आत्मिक विकास कर सकते हैं। केंद्र की वरिष्ठ सदस्य और राजकीय आदर्श बालिका इंटर कॉलेज ज्योतिर्मठ की प्रधानाचार्या उर्मिला बहुगुणा ने अपनी हाल की ऑरो वैली साधक सम्मेलन का प्रेरक अनुभव सुनाया। उन्होंने कहा कि माताजी के जीवन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। दर्शन दिवस का कार्यक्रम प्रकाश पँवार के कुशल संचालन में सम्पन्न हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *