बैसाखी पर्व पर आज गंगा घाट हरिद्वार में उमडा जन सैलाब

तीर्थ नगरी हरिद्वार– बैसाखी के पावन पर्व पर आज हर की पौड़ी पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के करीब 3 बजे से ही श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पवित्र धारा में डुबकी लगानी शुरू कर दी। “हर-हर गंगे” के गगनभेदी जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय और ऊर्जावान हो उठा। गंगा स्नान में डूबी श्रद्धा, ठंडे जल में मिला आध्यात्मिक सुकून
गर्मी के बढ़ते प्रभाव के बीच श्रद्धालु गंगा के शीतल एवं निर्मल जल में लंबे समय तक स्नान करते नजर आए। कई श्रद्धालु बीच धारा तक पहुंचकर अपनी आस्था की डुबकी लगाते दिखे।
मां गंगा का पावन जल मानो हर मन को शुद्ध, शांत और संतुष्ट कर रहा था।
पूजन-अर्चन और अर्घ्य से गूंजा तीर्थ, हर चेहरे पर संतोष
स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया और अपने आराध्य देवों का पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कुशलता की कामना की।
हर की पौड़ी स्थित मंदिरों में संकल्प, मंत्रोच्चारण और पूजा का क्रम दिनभर चलता रहा। वहीं गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं ने अरदास कर मानवता और भाईचारे का संदेश दिया।
बैसाखी का यह पर्व केवल आस्था ही नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और इतिहास का प्रतीक भी है। यह दिन किसानों के लिए रबी की फसल—विशेषकर गेहूं—के पकने की खुशी का पर्व है।
साथ ही सिख धर्म के लिए यह दिन खालसा पंथ की स्थापना की गौरवगाथा से जुड़ा है, जब गुरु गोविंद सिंह ने धर्म, साहस और बलिदान का अमर संदेश दिया।
हिंदू पंचांग के अनुसार बैसाखी को नव संवत्सर का आरंभ भी माना जाता है। इस कारण यह पर्व नई ऊर्जा, नए संकल्प और नई शुरुआत का प्रतीक बन जाता है।दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु, हरिद्वार बना आस्था का केंद्र
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने हरिद्वार में गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित किया।
हर कोई अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना लेकर यहां पहुंचा और भक्ति में लीन नजर आया।
